4 Feb 2013

सिलसिला 16


एक दूसरी दुनिया की सैर करके वापस लौटे.

मैं धीरे से उसके ऊपर से उठने लगा तो उसने फिर मुझे कस लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ टिका दिए.

दोनों गहन चुम्बन-रत हो गए. फिर उसने गाल पर एक मीठी पप्पी देते हुए कहा......थैंक्यू.

मैंने भी उसको पप्पी देते हुए कहा सेम टू यू.

फिर मैं उस पर से उठा और साइड में पलटते हुए ब्लेंकेट में घुस गया.

पहली बार ऐ.सी. की ठंडक महसूस हुई वरना तो माहौल इतना गरम था कि ठंडक का पता ही नहीं चल रहा था.

मैं आपको बता नहीं सकता के मुझे कितना मज़ा आया.

घुप्प अंधरे में, एक अत्यंत भरे बदन वाली कामुक लड़की के साथ, जो के एकदम अजनबी है, सेक्स करने का मज़ा..........अवर्णनीय है.

वो साथ में होते हुए भी आपकी इमेजिनेशन सौ फीसदी इन्वोल्व थी इस पूरी प्रक्रियां में. सारी कांशियसनेस और होश उस लड़की की छवि बना रहा था.

सारा कृत्य ही इतनी अवेयरनेस के साथ हुआ कि मज़ा तो कई गुना ज्यादा आना ही था. इंसान को हमेशा ही अननोन में बहुत ज्यादा आनंद आता है.

आज मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ. इस तरह ये डार्क नाईट अननोन सेक्स की समाप्ति एक विशिष्ठ तृप्ति के साथ हुई.

वो उठी और फिर कुछ चलने की आवाज़ सुनाई दी. मैं एकदम रिलेक्स होकर पड़ा रहा.

अचानक लाईट आन हुई और मेरी आँखे एकदम से बंद हो गई.

अरे इसने लाईट क्यों चला दी. क्या उसे मैं देख सकता हूं........मेरे रोंगटे खड़े हो गए इस विचार से ही.

मैंने आँख खोलने का असफल प्रयास किया और फिर चिल्लाया...........आयशा....आयशा.......

कोई भी रेस्पोंस नहीं मिला मुझे. मैंने अपनी आँखों को लाईट की तेज़ी से समायोजित करते हुए जैसे तैसे खोला और इधर उधर देखने लगा.

कहाँ है वो.........मेरा दिल जोरो से धडकने लगा.............

क्या वो मेरी कल्पना जैसी होगी या फिर एकदम अलग........मेरी जिज्ञासा चरम पर पहुँच गई और रोमांच उसके तो कहने ही क्या...................

अचानक दीवार पर मुझे एक सफ़ेद छाया नज़र आई. मैंने अपनी आँखों को मसला और गौर से देखा कि कौन है.

मेरा दिल धाड़ धाड़ करके बज रहा था.........मैं काम्पने लगा.........

और मेरी दृष्टी जैसे ही साफ़ उई, अचानक दिमाग में एक जोर का धमाका हुआ और मैं सुन्न सा हो गया
अचानक दीवार पर मुझे एक सफ़ेद छाया नज़र आई. मैंने अपनी आँखों को मसला और गौर से देखा कि कौन है. 

मेरा दिल धाड़ धाड़ करके बज रहा था.........मैं काम्पने लगा.........

और मेरी दृष्टी जैसे ही साफ़ उई, अचानक दिमाग में एक जोर का धमाका हुआ और मैं सुन्न सा हो गया..........

जोर का झटका एक दम जोर से लगा.

हुआ यूँ कि एक सफ़ेद साया दूर लाईट के पास दिखा. गौर से देखने पर किसी ने अपने आपको सफ़ेद चादर से ढँक रखा था. 

फिर उसने अपना मुंह बाहर निकला और चेहरा देखते ही मुझे करंट लगा. मैं यकीन नहीं कर पा रहा था कि ये थी अभी मेरे साथ..........................

जरीन!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

बस उसे आँख फाड़े देखता ही रह गया. वो मुस्कुराते हुए चादर लपेटे हुए मेरे पास आई. 

मेरे गालों पर एक ऊँगली फिराते हुए एक चुम्मा दे दिया. फिर भी जब मैं स्टेचू ही बना रहा तो उसने मुझे झिंझोडा ........हे अभी, अरे ये मैं हूं यार, इतना अचंभित क्यों है.........

तुम ......तुम तो चली गई थी........फिर.......तो ये तुम थी................मेरा तो दिमाग ही काम नहीं कर रहा है...........’......मैं बहुत ही विस्मय के साथ बड़ी मुश्किल से बोल पाया.

सॉरी अभि, तुम्हे अँधेरे में रखने के लिए.............बट सच बताओ...........मज़ा तो आया ना........

मज़ा...........भयंकर से भयानक मज़ा आया.....पर ये सब हुआ कैसे.........तुम कैसे आई......तो तुम्हारी दोस्त जो शुरू में यहाँ थी वो कहाँ और कब गायब हो गई..........ये....

बस बस ........सब बताती हूं.........तो जानू ये था मेरा असली सरप्राइज़, आई होप की तुम्हे पसंद आया होगा'

जब तुम नहाने गए तब मेरी सहेली चली गई और उसकी जगह मैं आ गई और फिर पूरे वक्त हम दोनों ही थे यहाँ..............व्हिस्पर में बोलने के कारण तुम मेरी आवाज़ नहीं पहचान पाए.’....वो थोड़ा रुकी.

पर अभि, मैं बता नहीं सकती कि ये डार्क नाईट सेक्स में मुझे कितना ज्यादा मज़ा आया. ये कुछ अलग ही था..........थेंक्स अभि.’..............और ये कहते हुए उसने अपने होंठ से मेरे होंठो पर एक गीली गीली पप्पी ले ली.

ज़रीन द ग्रेट, मान गया तुम्हे और तुम्हारे सरप्राइज़ को......हेट्स ऑफ टू यू यार.और ये कहते हुए मैं थोड़ा सा ब्लेंकेट से बाहर आया और उसे चादर समेत जोर से गले लगा लिया.

अचानक उसने मुझे थोड़ा परे किया और मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों में भरते हुए बोली......अभि, अब मुझे तुमसे सच में ही माफ़ी मांगनी पढेगी क्योंकि वाकई मेरी सुबह दोहा कि फ्लाईट में ड्यूटी है और देखो कितना लेट हो गई हूं.

ओह नो, थोड़ी देर तो रुक जाओ ज़रीन.

अभि, कल मैं शाम तक आ जाउंगी, बस शाम के बाद सिर्फ और सिर्फ हम दोनों, ठीक है.’ .... ये कहकर उसने चादर हटाई और बाथरूम की ओर चल पड़ी.

उस शार्ट और ट्रांसपेरेंट नाइटी में उसका ढला हुआ शरीर को देखकर मेरे शरीर में रोमांच की लहर दौड़ गई. मैंने उसे पुकारा कि दो मिनट तो इधर आओ तो वो हँसते हुए घड़ी में समय बताते हुए बाथरूम में घुस गई.

जब तक वो तैयार होकर बाहर आई मैं भी कपड़े पहन कर तैयार हो गया.

मैंने उसे बाँहों में भरा तो वो समय की दुहाई देने लगी. उसका इस तरह ठंडापन मेरे उत्साह पर पूरा पानी फेरता चलता गया. मैं उसकी मजबूरी को बड़ी ही मजबूरी के साथ स्वीकार करते हुए तुरंत बाहर आ गए.

उसने अपनी टेक्सी पकड़ी और मैंने अपनी.
कोंटिनेंटल ब्रेकफ़ास्ट के लिए होटल की मध्य लोबी में स्थित अल-नखिल लाउंजमैं पहुंचा. 

नाश्ते के दौरान मेरी नज़र स्वाभाविक रूप से चार-पांच अति सेक्सी सुंदरियों और उनसे घिरे एक शेख पर पड़ी. वो काफी हँस बोल रहे थे.

मैं नाश्ता खतम करके भी वहीँ बैठे बैठे उन्हें निहार रहा था. 

वे जब उठ कर चले गए, तो मैं भी उठा और बाहर आने लगा. इस दौरान मुझे शेख जहाँ बैठा था वहाँ सोफे पर एक लाल शनील की पोटली नज़र आई. शायद वो शेख भूल गया था.

मैंने वो पोटली उठाई और तुरंत कर पार्किंग की ओर भागा. नीचे पोर्टिको में मुझे वो नज़र आया और मैंने उसे रोका. 

उसने सुंदरियों को जाने का इशारा करके वो मेरे पास आया. जब मैंने उससे उस पोटली कि तस्दीक करा कर उसके हवाले की तो उसने लिटररी मुझे गले लगा लिया.

बिरादर, तुम नहीं जानते तुमने मुझे कितनी कीमती चीज़ लौटाई है. आज के ज़माने में भी तुम जैसे लोग होते हैं मैं सोच भी नहीं सकता था.

उसने मुझे बताया कि उसमे कीमती डायमंड थे. मुझे उसने इनाम देने की पेशकश की जिसे मैंने विनम्रता से ठुकरा दिया. वो मेरा कायल हो गया.

बिरादर, मेरा नाम मोहम्मद बिन-ज़ायद अल-मख्तूम है और मेरा बहुत बड़ा केसिनो है दुबई में. अब तुम मेरे खास दोस्त और मेहमान हो. अब जब तक तुम यहाँ हो, देखो मैं तुम्हारी कैसी खिदमत करता हूं. चलो आओ लॉबी में बैठकर बातें करते हैं.

उसने फोन पर ड्रायवर को कुछ देर वेट करने का बोल कर मुझसे मुखातिब हुआ.

दरअसल केसिनो के बेसमेंट में मेरा एस्कोर्ट सर्विस का सीक्रेट बिजनेस है. सारी दुनिया का चुनिन्दा और नायब हुस्न मैं यहाँ के हाई क्लास रईसों को उपलब्ध कराता हूं. एक हाई क्लास केटेगरी भी है जिसमे हफ्ते में एक बार हम किसी सेलेब्रिटी को आक्शन करते हैं. वो सिर्फ १०-१२ खास मेंबर के बीच ही होता है.

तुम्हे एकदम मज़ा आ जायेगा क्योंकि बोलीवुड का बहुत हुस्न है मेरे यहाँ. और इस बार की आक्शन गर्ल भी इंडिया से आ रही है आज. परसों दिन में आक्शन है, तो कल दिन में वो फ्री रहेगी और दोस्त कल तुम और वो............

ये सुन कर मेरे रोंगटे खड़े होने लगे. मेरी तो एकदम से लोटरी ही निकाल आई थी.

कौन है वोमैंने रोमांच से पूछा.

बिरादर, आक्शन गर्ल को हम बहुत सीक्रेट रखते हैं और सिर्फ विनर को ही बस उसके बारे में पता चलता है वो भी एक राउंड खतम होने के बाद. पहला राउंड तो हमारा विनर सोच सोच के ही मर जाता है कि आखिर ये सेलेब्रिटी कौन है.

ये तो कल रात मैंने भी महसूस किया डार्क नाईट अननोन सेक्स करके.

तुम कल की छोडो बिरादर. तुम अभी चलो मेरे साथ. बोलीवुड की इस वक्त आठ सुंदरियां मौजूद है. जैसे चाहो वैसे एन्जॉय करो.और ये कहकर उसने मेरा हाथ थामा और अपनी मर्सीडीज़ मैं बैठा कर अपने केसिनो की ओर ले चला.

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केसिनो पहुँच कर मुझे वो अपने सीक्रेट बेसमेंट में ले गया. 

एक बहुत बड़ा राऊंड रूम था जिसके बीचो बीच एक गोल स्टेज था और घेरे में बैठने की शानदार कुर्सियां लगी हुई थी.

मोहम्मद ने बताना शुरू किया कि किस तरह से आक्शन का खेल होता है यहाँ.......

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हमारे सभी सम्माननीय और रईस मेहमान दोपहर २ बजे तक यहाँ मौजूद कुर्सियों पर आकर अपना स्थान ले लेते हैं. ठीक २ बजे सभी लाइट्स बंद कर दी जाती है.

धीमी आवाज़ में कामुक अरेबियन संगीत फिजां को रंगीन बनाता रहता है. हमारा एक आदमी स्टेज के पास माइक लेकर खेल शुरू करवाता है. 

मंच के बीचोबीच हमारी आक्शन सेलेब्रिटी निचे से एक लिफ्ट के द्वारा प्रकट होती है. एक बहुत ही मद्धिम रंगीन रोशनी उस पर पड़ती है.

उसके चेहरे पर एक नकाब होता है कि उसे पहचाना ना जा सके. वो एक पारदर्शी गाउन में लिपटी हुई होती है जिससे उसके जिस्म का जर्रा जर्रा नुमाया होता है.

तालियों से स्वागत के बीच उद्घोषक, अब उसके जिस्म की तमाम खूबियाँ मेहमानों को बताता है. वो सेलेब्रिटी फिर धीरे से अपना गाउन गिरा कर अपने शफ्फाक़ जिस्म की नुमाइश करते हुए विभिन्न कामुक पोज़ बनाती है.'

अब तक हम मंच के ऊपर पहुँच चुके थे. उसने आगे बताना शुरू किया.... 

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उद्घोषक अब बेस प्राइज से बोली शुरू करता है. कल की हमारी बोली १०० हज़ार दिरहम (पंद्रह लाख रूपये) से प्रारंभ होगी. 

मेरा अनुमान है कि ये २०० से २५० हज़ार दिरहम तक जाएगी. 

बोली के दौरान एक व्यवस्था और रखी जाती है कि दस हज़ार दिरहम देकर कोई भी मेहमान उस सेलेब्रिटी को २ मिनट तक पास जाकर छू कर, देख कर उसके हुस्न को करीब से महसूस कर सकता है. 

अमूमन सभी १४-१५ मेहमान इस आप्शन को लेते हैं. इस दौरान उन्हें अपना हाथ उसके पूरे शरीर पर फिराने की आज़ादी होती है. 

हाँ वो उसका चेहरा नहीं देख सकता, योनी में अन्दर हाथ नहीं डाल सकता है और चून्चियों को सिर्फ आहिस्ता से सहला सकता है. 

हाथ तो किसी एक के ही लगेगी वो पर कम से कम कुछ तो मज़े सारे मेहमान लेकर ही जाते हैं.'

मैं सारी बातें सुनकर अचंभित हो उठा. कितना कामुक द्रश्य रहता होगा वो.

इतनी महंगी हसीना जिसके लिए बाकि सभी लोगों की KLPD हो जाती है वो कल मुझे मिलने वाली है ......ये सोच सोच कर मेरे रोमांच की कोई सीमा नहीं रही. 

'
मोहम्मद भाई, मैं आपका दिल से बहुत आभारी हूँ कि आपने मुझे इस लायक समझा और ऐसा नायाब तोहफा दे रहे हैं.'

'
बिरादर, आपने तो मोहम्मद भाई को ही जीत लिया है, आपके लिए तो जितना भी करूँ वो कम है. '

इसी तरह से बातें करते हुए हम एक दुसरे हॉल में पहुँचते हैं जहाँ पर कुछ हसीनाएं सिर्फ छोटे से टॉप और स्किर्ट में गपशप कर रही थीं. 

वहां पर याना गुप्ता और उदिता गोस्वामी भी थी और बाकी दुसरे मुल्कों की लग रही थी. 

जैसे ही उन्होंने हमें आते देखा, सब की सब दौड़ कर मोहम्मद के इर्द गिर्द आकर चिपक कर खड़ी हो गई. 

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चलो तुम सबको मेरे एक बहुत ही प्यारे मेहमान से मिलवाता हूँ, ये अभि भाई हैं, इंडिया से आयें हैं. आज आप सबको इनका खास ख्याल रखना है. और बिरादर ये मेरी प्यारी प्यारी गर्ल फ्रेंड्स हैं.'

और फिर बारी बारी से सबका परिचय करवाया. सब मुझसे गले मिल मिल कर अभिवादन करती रहीं.

मोहम्मद भाई आपके खास मेहमान तो हमारे अति खास मेहमान. अब देखिये कैसी खिदमत होगी अभि जी की.’.....ये कहते हुए उदिता मेरे गले लगी और अपने होंठ मेरे होंठों से मिला दिए.

मैं तो जैसे अपने आप में ही नहीं था. उदिता के होंठ से उसका रस चूसने लगा. 

फिर वो मुझे अपने भव्य ऑफिस में ले गया.
उदिता बोली...मोहम्मद भाई आपके खास मेहमान तो हमारे अति खास मेहमान. अब देखिये कैसी खिदमत होगी अभि जी की.’.....ये कहते हुए वो मेरे गले लगी और अपने होंठ मेरे होंठों से मिला दिए.

मैं तो जैसे अपने आप में ही नहीं था. उदिता के होंठ से उसका रस चूसने लगा.

फिर वो मुझे अपने भव्य ऑफिस में ले गया.

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अब आगे.......
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ऑफिस की सजावट देखते ही बनती थी. कुछ ही देर में उदिता बोलीवुड से आई छ: और सुंदरियों के साथ ऑफिस में प्रविष्ठ हुई. सभी एक छोटे से टॉप और स्किर्ट में थी.

सभी आकर मोहम्मद की आलिशान कुर्सी के आसपास खड़ी हो गई और मुझे कौतुहल से देखने लगी.

इनसे मिलो, ये मेरे एकदम खास मेहमान और छोटे भाई जैसे हैं. तुम सबको इनका खास ख्याल रखना है.’...........मोहम्मद उन सब से बोला.

मोहम्मद भाई, आप जरा भी फ़िकर न करें. खुदा कसम आज इन्हें हम जन्नत की सैर करा देंगे.

वैसे भाईजान, ये भी माशाल्लाह , किसी हीरो से कम नहीं हैं.........मज़ा आएगा.’.........वीना मलिक पीछे से चहकते हुए मेरे पास आकर बोली.

फिर उसने मुझे बाँहों में भरते हुए मस्त चुम्मा दिया. वीना को अपनी बाँहों में पाकर मैं बहुत उत्तेजना से भर गया और उसके भारी नितम्बों को हाथ में भरकर जोर से दबा दिया.

चलिए आप सब भी बारी बारी से हमारे दोस्त से परिचय कीजिये.’...........मोहम्मद अब बाकी सब से मुखातिब होते हुए बोला.

वीना हटी तो उसके ठीक पीछे से मेघना नायडू बाहें फैलाये मेरी ओर बड़ी.

पहले होंठों का चुम्मा लिया ओर फिर उसने अपने मम्मे मेरे सीने में घुसा कर उन्हें थोड़ा मसला. मैं उसके शरीर पर जहाँ भी हाथ गया उसे सहलाता चला गया.

फिर आई याना गुप्ता. बिलकुल फ्रेंच गुड़िया जैसी लग रही थी. हालांकि चेहरा उसका भावहीन था फिर भी मुझे बड़ी गर्मजोशी से किस करने लगी.

उसे तो मैंने बाँहों में भरकर लगभग उठा ही लिया. मेरा पप्पू एकदम तन चुका था. वो याना की योनी पर एकदम गुचा.

वो 'ओउच' करते हुए नीचे उतरी और मुझे एक मुक्का मारते हुए बोली यू नोटीऔर फिर अपनी योनी सहलाती हुई पीछे चली गई.

मेरा पप्पू एकदम नब्बे डिग्री पर सर उठाये पेंट को तम्बू बनाने की कोशिश में लगा हुआ था.

मैं उसे ऊपर से ही सेट करने का प्रयास करने लगा तभी शेफाली ज़रीवाला आगे आई और उसने मेरे बेल्ट को ढीला करके ट्राउसर का बटन खोला और अपना हाथ मेरे क्रोच में घुसा दिया.

फिर पप्पू को थामा और थोड़ी कोशिश के बाद ऊपर की ओर कर दिया. मेरे पप्पू पर ऐसी सरसराहट हुई कि जैसे कि कोई ....काँटा लगा....... हाय लगा’.

जैसे ही उसने मुट्ठी में थामा तो सहज ही बोल पड़ी हाय रे एकदम मस्त हथियार है हमारे भाईजान के दोस्त का तो.

ये सुनते है सारी की सारी खिलखिला के हँस पड़ी. मोहम्मद भी मुस्कुराये बिना नहीं रह पाया. मेरे कान थोड़े से लाल हो गए.

अबके शेफाली ने अपनी क्रोच मेरे हथियार पर रखी और उसे मसलते मसलते मेरे हाथ उसके मोम्मों पर रखवा लिए.

मैं उन्हें मसलने लगा. फिर उसने अपना मुंह मेरे मुंह में दिया और अपनी लार मेरे मुंह में ट्रांसफर करने लगी.

उसके मुंह और सांस से बड़ी ही अच्छी खुशबू आ रही थी. मेरे पूरे होंठ गीले हो गए.

उसके हट्ते ही पूनम पांडे सामने आ गई. एकदम छम्मक छल्लो लग रही थी. 

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